हर रोते को अब हँसना होगा
ख़ुश्क हो गयी है शाखें,हमें संभलना होगा
इस तस्वीर को दोस्तों अब बदलना होगा
जड़ें सूख न जाएँ इस वृक्ष की
इसके पहले ही उस मिटटी को पलटना होगा
बाँध के रखें इस सब्र को कब तक
बाँध को आख़िर तो फटना होगा
सहम जाएँ जब फूल माली को देख
हर हाल में उस माली को हटना होगा
इस अँधेरे को छटना होगा,हर रोते को अब हँसना होगा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें