मधुशाला
मधुशाला ख़ुद राह तके कोई तो आए मतवाला
बेहोश हो मदहोश हो इस कदर कोई पीनेवाला
जाने कब कब छलक पड़ा था,मधुशाला में मधु का प्याला
कोई न था पीनेवाला कोई न था पीनेवाला
देख देख कर राह किसी दिन निकल पड़ी खुद मधुशाला
युग-युग में आता है हरदम मन-मोहन वो मुरलीवाला
कर कुछ ऐसा हो प्रज्वलित अंतर्मन में वो ज्वाला
जीवन नाम है राम मनहर मदहोश हो खुद मधुशाला
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